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डॉ. एच. सी. सिंह


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आखिर सांप्रदायिक कौन…..

Posted On: 15 Apr, 2012  
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भटकाव की स्थिति में नेहरू युवा केन्द्र

Posted On: 11 Apr, 2012  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

जय श्री राम डाक्टर सिंह बहुत ही सार्थक और तथ्यपूर्ण लेख लिखा हमारे देश में सत्ता के लिए नेता लोगो को बेफकूफ बनाते और वे बन जाते है सब वोट बैंक की राजनीती जनता परिवार सिधांत हीन परिवार है लेकिन मीडिया भी सेकुलरिज्म के नाम पर मोदीजी पर हमला करता है.लालू भ्रष्टाचार में जेल से जमानत में है उसे इतना महामंडित क्यों करते आज कल सेकुलरिज्म के नाम पर मीडिया,बुद्धजीवी,सेक्युलर ब्रिगेड मोदीजी/बीजेपी/आरएसएस/विहिप पर हमला करने में लगे है केजरीवाल भ्रष्टाचार के नाम पर लड़ते कांग्रेस से मिलकर मोदीजी से लड़ रहा है येही देश का दुर्भाग्य हिन्दुओ को गाली देते परन्तु मुसलमानों और इसाईओ पर चुप लेख के लिए साधुवाद

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

डा. सिंह जी प्रणाम बहुत दिनों के बाद सटीक एवं अनुवांछित टिप्पणी आप की तरफ से आई है बहुत बहुत धन्यवाद आप ने हिंदुत्व वादी कटटरपंथीओं को आइना दिखलाने का प्रयास किया है जो शायद श्री नरेंद्र मोदी जी को देश का प्रधान मंत्री कम और आर एस एस के हाथों का खिलौना अधिक समझतें हैं उन्हें शायद ये गुमान है कि इस बार भी बी जे पी ने हिदुत्व के मुद्दों पर ही सत्ता पाई है वे समझने लगे हैं कि देश की बुद्धिजीविता पूर्णतया समाप्त हो चुकी है इस तरह की बयानबाजी कर के तो वे मोदी जी की छवि को ही धूमिल कर रहे हैं वे भी अब शायद किंकर्तव्य विमूढ़ हो रहे हैं कि क्या करें और क्या न करें , काश कोई उन मद्दान्ध प्राणियों को कोई वस्तुस्थिति से अवगत करा सकता भगवानदास मेहंदीरत्ता

के द्वारा: bhagwandassmendiratta bhagwandassmendiratta

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

डॉक्टर साहब आपने ढोंगी बाबाओ पर काफी अच्छी जानकारी एकत्र कर रखी है जिसके लिए आप प्रशंसा के पात्र है....इसके आलावा भी आपने समाज में फैले पाखंड पर बहुत सटीक बाते हमारे सामने रखी.....समाज में व्याप्त इस बुराई के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार हमारी शिक्षण पद्धति और समाज स्वयं है, सालों पढ़ाई करने के बाद भी व्यक्ति वैज्ञानिक सोंच विकसित नहीं कर पाता और धर्म का नाम आते ही एक अशिक्षित व्यक्ति की तरह अंधा हो जाता है....कुछ व्यक्ति जो इस तरह के आडम्बरों का विरोध करते हैं उनको नास्तिक और नासमझ कहा जाता है तथा पाखंडियों द्वारा और उनके अंध भक्तो द्वारा उल्टा उन्ही का विरोध शुरू कर दिया जाता है....राजनीतिज्ञ इस मामले में पड़ते नहीं क्योंकि इससे उनके वोट बैंक पर असर पड़ने का खतरा बना रहता है....लेकिन एक बात बिलकुल समझ में नहीं आती की धर्म के नाम पर सदियों से ठगी जाने वाली आम जनता स्वयं कब समझेगी की ये सब कुछ वाक्पटु लोगों के पैसे कमाने के धंधे मात्र है न की समाज या उनकी स्वयं की भलाई के उपाय...आपने इस मामले पर बहुत अच्छा लेख लिखा इसके लिए आपको बधाई मेरे एक ऐसे ही लेख पर आपके विचारों का स्वागत है http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/05/15/कुछ-तो-लोग-कहेंगे/

के द्वारा: panditsameerkhan panditsameerkhan

यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि नेहरू-गांधी परिवार के सम्मोह में भारतीय राजनीति में ‘..वाद’ नामक बुराई लाने वाली पार्टी कांग्रेस ही है। फिर तो यह सोचा भी नहीं जा सकता है कि नेहरू-गांधी परिवार या सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बिना कांग्रेस का कोई अस्तित्व हो सकता है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक इसी परिवार के लोगों ने सबसे ज्यादा समय तक देश पर शासन किया है। वंशानुक्रम में अब राहुल गांधी का अगला प्रधानमंत्री होना निश्चित है। जबकि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर अनुभव, वरिष्ठता एवं योग्यता के आधार पर लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के अनुसार चयन होना चाहिए। यदि यह पैमाना अपनाया जाये तो राहुल गांधी से बेहतर कई नेता पार्टी में मौजूद हैं। एक खानदान की पार्टी होने के कारण इस बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। इतना ही नहीं, इन्दिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी तक प्रधानमंत्री एवं पार्टी अध्यक्ष दोनों पद एक ही व्यक्ति के पास रहा। सीताराम केसरी के कार्यकाल वर्ष 1997-98 को छोड़ दें तो तब से लेकर आजतक सोनिया गांधी ही पार्टी अध्यक्ष हैं। लोकतंत्र का बेडा गर्क तो नेहरु के प्रधानमंत्री बनने से ही शुरू हो गया था ! क्योंकि उस वक्त नेहरु से भी कई योग्य व्यक्ति मैदान में थे किन्तु गाँधी के प्रिय होने के नाते नेहरु को वरीयता दी गई ! हम इसे लोकतंत्र नहीं कह सकते ये केवल एक परिवार का राजतन्त्र है जो अपने आप को इस देश की गरीब जनता का हितेषी दिखाकर , इस देश को लूट रहा है ! बेहतरीन लेख सिंह साब !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

डॉ साहब आप की एक एक बात सही है । आज लोकशाही जीस रूपमें है उसे देख कर लगता है ईस से तो राजा शाही अच्छी थी । पिछले साल एक पत्रकारने एक १२७ साल की माता जी को राजकारण पर सवाल किया था । उस ने इतना ही बताया - राज तो राणा का --। मतलब की लोकशाही से वो छोटा राजा अच्छा था जीसे वो राणा कहती थी । भले वो राणा अन्ग्रेज का गुलाम रहा हो । ये बात अपने सवा सौ साल के जीवन के अनूभव पर कही थी । लोकशाही राज करने का एक प्रकार मात्र है । कोई भी शाही हो, तानाशाही, सैनिकशाही या लोकशाही, यदी शाह ही प्रजा या राष्ट्रप्रेमी ना हो तो वो शाही किसी काम की नही । तानाशाह अगर प्रजाप्रेमी हो तो तानाशाही अच्छी, यदी सैनिक देशप्रेमी हो और वो सैनिक शाही लाये तो वो भी अच्छा है । हमारी जनरेशन के आगे लोकशाही के गाने गा गा कर एक माहोल बनाया गया । लोकशाही बचाओ, लोकशाही बचाओ । प्रजा को बचाओ या देश को बचाओ कोइ नही कहेगा । लोकशाही किस के लिए है । प्रजा के लिए । और प्रजा को कहा जाता है लोक शाही बचाओ । अगर लोकशाही में ही अपना बचाव करने की क्षमता ना हो तो वो प्रजा का कल्याण क्या करेगी । जनता को एक अच्छी सी शाही की जरूरत है । भारत की लोकशाही जैसी घटिया लोकशाही से ईतराने की बिलकूल जरूरत नही है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

यह सर्व विदित है कि “सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है” तब भी लोग चमत्कार के रूप में विद्यमान असत्य विद्या के पीछे क्यों भाग रहे हैं, समझ से परे है। हमे तो परमात्मा से बस यही प्रार्थना करना चाहिए कि: तूने हमे उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू। सृष्टि की बस्तु-बस्तु में, विद्यमान हो रहा है तू।। तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते तेरी दया। ईश्वर हमारी बुद्धि को, सद्मार्ग पर तू चला।। आदरणीय सिंह साहब, नमस्कार! आपने तथ्यों के आधार पर सम्पूर्ण विवेचना की है. अंत में सुन्दर सन्देश भी दिया है. आप ऐसे ही लिखते रहें और और मार्गदर्शन करते रहे! आपको 'ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक' सम्मान के लिए बधाई!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

अत्यंत सुन्दर. बिना परिश्रम किये संक्षिप्त रास्ते से धन-दौलत, यश-कीर्ति पाने की लालसा रखने वाले आज अनगिनत है. यह सब मीडिया की देन है. मीडिया ऐसे लोगो में इस तरह से हवा भरता है की ये आसमान में उड़ने लगते है और रातो रात जनता में हीरो बन जाते है इसे का फ़ायदा उठाकर लाखो- करोडो में खेलते है. स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ........श्री श्री रवि रवि शंकर आदि ...... यदपि दार्शनिक, rastra हित .....सम्बन्धी बाते करते है जिससे न केवल जनता में उनकी छवि अच्छी है लेकिन इनमे मीडिया की हवा भरी है .बिना मीडिया की हवा के ये सब फूस हो जायेगे. गाँधी जी बिनोवा भावे जी.... आदि सज्जन लोगो ने बिना मीडिया की हवा के देश हित के कम किये है , कर्म किया है उपदेश नहीं देये है, तभी देश उनको याद करता है, चन्द्र शेखर आज़ाद, भगत सिंह , विस्मिल्लाह खान .........महान देश भक्तो ने त्याग किया है, कोई चमत्कार नहीं किये. इसमें कोई संदेह नहीं स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ........श्री श्री रवि रवि शंकर आदि .....के करोडो करोडो अनुयाये है, इन लोगो की बात पर भक्तगण कुछ भी करने को नहीं हिचकिचाते है .यदि ये अपने अनुयाई लोगो से पेड़ लगाओ आन्दोलन चलवाए तो न केवल एक महीने में देश के कोने कोने में हर किस्म के सुन्दर छायादार करोडो करोड़ पेड़ लग जायेगे जिसका सबब ये होगा की लोग स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ........श्री श्री रवि रवि शंकर आदि ......के नाम से पेड़ का नाम लेगे और उनके सामने यह प्रतीक स्वरुप हमेश रहेगा की इन महापुर्शो का सन्देश देश की लोगो में भ्रस्टाचार, बेमानी, मककारी, आदि बुराई के खेलाफ़ लोगो में रास्त्र हित, देश प्रेम , सौहाद्र ,दर्शन, ............सभी अच्छे अच्छे कर्म के लिए मार्ग दर्शन का प्रतिक होगे. आज नहीं कुछ वर्षो में ये पेड़ देश में बड़ी क्रांति लायेगे, इन पदों में मीडिया की हवा नहीं होगी इनमे स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ........श्री श्री रवि रवि शंकर आदि ......की भावना होगी .

के द्वारा: ajitsaxena ajitsaxena

डॉ. साहब, नमस्कार! आपका लेख अपने आप में सम्पूर्ण है पर इसे सर्वमान्य बनाने के लिए ब्यापक बहस की जरूरत है साथ ही इस पर भी विचार करने की जरूरत है की आखिर बहुसंख्यक कहे जाने वाले हिन्दू, भारतीय एकमत क्यों नहीं है. सबका सर्वांगीण विकास क्यों नहीं हो रहा है.विभिन्न समारोहों के बजाय एक राष्ट्र हित से सम्बंधित कार्यक्रम क्या नहीं आयोजित किये जाने चाहिए? सबको सामान अवसर मिले और उचित मर्यादा भी, क्या यह भी जरूरी नहीं है. अमीर गरीब की परिभाषा और इनके बीच की खाई कितनी गहरी होनी चाहिए. सबको रोटी कपड़ा और मकान की मूलभूत आवश्यकता की पूर्ती पर पहले विचार ज्यादा जरूरी नहीं है? भ्रष्टाचार में क्या सभी पार्टियाँ और नेता बराबर के हिस्सेदार नहीं हैं? कांग्रेस का विकल्प हम देने में मजबूर क्यों है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ही सत्ता में क्यों आयी? आज दिल्ली नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस हारी है और भाजपा की जीत हुई है क्योंकि यहाँ लोगों को दो में से एक को चुनना था. कांग्रेस से सभी ट्रस्ट हैं इसलिए वहां भाजपा जीती है. भाजपा का रोल मॉडल जो गुजरात में दीखता है दुसरे राज्यों में क्यों नहीं? यह सब विचारणीय है. आपके लेख महत्वपूर्ण हैं और विचारणीय भी पर कुछ और प्रश्न जो अनुत्तरित हैं उनका भी समायोजन होना चाहिए. चाहे आप उसे दुसरे आलेख में समाहित करें. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh




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