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ढोंगी बाबाओं की पाखंडी दुनिया

Posted On: 13 May, 2012 Others में

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जब व्यक्ति बिना परिश्रम किये संक्षिप्त रास्ते से धन-दौलत, यश-कीर्ति पाने की लालसा रखता है, व्याधि आदि से मुक्ति चाहता है तो वह ऐसे किसी चमत्कारिक शक्ति की खोज में निकल पड़ता जो तत्काल उसकी मुराद पूरी कर सके। उसे ऐसे अनेक तथाकथित सिद्ध पुरुष जो अपने को चमत्कारिक शक्तियों से पूर्ण बताते हैं, सहजता से मिल जाते हैं। अपनी वाकपटुता से उस व्यक्ति की मनोकामना की पूर्ति का पूरे विश्वास के साथ वचन देते हैं। एक बार ऐसे तथाकथित सिद्ध पुरुष के संपर्क में आ जाने के बाद किसी भी व्यक्ति का उसकी पकड़ से बाहर निकाल पाना आसान नहीं होता है। इस बात से अवगत होते हुए भी कि जिस चमत्कार से कष्ट दूर होने की बात की जाती है वह स्पष्ट रूप से ठगी है, फिर भी लोग ऐसे ठगों की ओर खींचे चले जाते हैं। उदाहरण स्वरूप निर्मल बाबा का प्रकरण हमारे सामने है। धोखाधड़ी जगजाहिर होने के बाद भी इनके समागम में लोग पूर्व की भांति भाग ले रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों का प्रसारण भी टीवी चैनलों पर नियमित रूप से चल रहा है। जब सामने बैठी भीड़ को सत्य और असत्य में भेद का कोई भान न हो तब तथाकथित चमत्कारी बाबा इसका लाभ उठायेगा नहीं तो क्या करेगा क्योंकि उसका तो लक्ष्य ही होता है झूठ-फरेब से पैसे ऐठना।

जीव का कर्म के साथ अटूट संबंध है और कर्म का फल के साथ। मानव को जीवन में दुख-सुख, लाभ-हानि, शुभ-अशुभ आदि उसके कर्मानुसार ही मिलता है, न थोड़ा ज्यादा और न थोड़ा कम। कर्म और फल का सम्बन्ध कार्य-कारण-भाव के नियम पर आधारित है। यदि कारण मौजूद है तो कार्य अवश्य होगा। यही प्राकृतिक नियम आचरण के मामले मे भी सत्य है। किये गये प्रत्येक कर्म का फल कर्ता को ही भोगना होता है। इसमे किसी प्रकार की एवजी नहीं चलती। यदि कर्ता अपने द्वारा किये गये सभी कर्मो का फल भोगे बिना ही मृत्यु को प्राप्त होता है तो उसे पुनर्जन्म पश्चात प्रारब्ध के शेष कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। देहावसान के पश्चात जीव केवल शरीर बदलता है। कर्ता के रूप में उसकी कभी मृत्यु नहीं होती है। जीवात्मा दुख-सुख, जीवन मरण आदि से परे होती है। जन्म-मृत्यु तो शरीर की होती है। ईश्वर की इसी व्यवस्था के अंतर्गत इस संसार में जीव का आना-जाना तब तक जारी रहता है जब तक वह अंतिम लक्ष्य मोक्ष को नहीं प्राप्त कर लेता। अन्य मत, जो पुनर्जन्म में विश्वास नहीं रखते, उनमे भी कयामत के दिन, न्याय या डूम्स डे के दिन कर्म के आधार पर ही रूहों के बारे मे निर्णय सुनाया जाएगा। इसीलिए उनके यहाँ आखिरत के दिन को ध्यान रखकर नसीहते दी जाती हैं। यह सर्व विदित है कि जीव कर्म करने में स्वतंत्र है लेकिन फल भोगने में नहीं। जीव के कर्मानुसार फल का निर्धारण ईश्वर, जो कि निराकार, सर्वव्यापक, अजन्मा, अनन्त, अनादि, अजर, अमर, नित्य, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अंतर्यामी एवं सृष्टिकर्ता है, करता है। ऐसी महान शक्ति को धारण करने वाले परमात्मा को किसी सहायक की आवश्यकता नहीं होती है और न ही उसकी शक्तियों का कोई बंटवारा हो सकता है क्योंकि वह सर्वव्याप्य है। फिर इन तथाकथित बाबाओं, मसीहों एवं फकीरों में कौन सी ईश्वरीय शक्ति आ गई जिसे ये बांटते घूम रहें हैं।

कुछ दिनों पहले निर्मल बाबा (असली नाम निर्मलजीत सिंह नरूला) के समागम और उसमे की जाने वाली अनर्गल एवं अवैज्ञानिक बातों की मीडिया में व्यापक चर्चा हुई। बात आगे बढ़ी तो कुछ भुक्त भोगियों ने बाबा के पाखंड का पोल खोलते हुए उनपर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। कई जगह उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई। मीडिया वालों ने जब गहराई तक जाकर जांच पड़ताल की तो विस्मयकारी खुलासा हुआ। सूत्रों के अनुसार बाबा के पास 240 करोड़ की संपत्ति है जो कि लोगों के साथ धोखा करके ऐंठा गया है। मैंने भी इस बाबा के कुछ समागम के कार्यक्रमों को टीवी पर इस आशय से देखा कि कौन सी ऐसी दिव्य शक्ति इनको प्राप्त हो गई है जिससे इनका तीसरा नेत्र जागृत हो गया है। बाबा द्वारा समागम में दर्शनार्थियों से यह पूछना कि आज आप ने गधा देखा, आप के पास पर्स है, आप ने लड्डू खाया, आप ने साँप देखा आदि सिद्ध करता है कि ऐसी ऊल-जलूल बातें किसी अज्ञानी एवं मूर्ख व्यक्ति की ही हो सकती है। ऐसी बाते करके एवं अपने तीसरे नेत्र से भक्तों की समस्या समझ कर उनके ऊपर कृपा की बौछार करना, पाखंड के अलावा कुछ नहीं है। कुछ ठीक इसी तरह कोई डेढ़ दशक पूर्व चंद्रास्वामी का तांत्रिक के रूप में भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ नरसिम्हा राव के कार्यकाल में उदय हुआ। प्रधानमंत्री से निकटता के कारण राजनैतिक क्षेत्र में ऊंची पहुँच बनी। चंद्रास्वामी अपने तथाकथित चमत्कारिक शक्ति के कारण देश-विदेश के अनेक नेताओं के साथ ही साथ अदनान खगोशी जैसे कुख्यात हथियार के सौदागर से भी जुड़े रहे। उनके खिलाफ आर्थिक अपराध के अलावा भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व॰ राजीव गांधी की हत्या में वित्तीय मदद का भी आरोप लगा। ऐसे तथाकथित दिव्यशक्ति वाले स्वामी केवल अंधविश्वास को बढ़ावा देकर समाज को ही नहीं बल्कि राष्ट्र को भी गंभीर क्षति पहुंचाते है। इसी तरह बाल्टी बाबा भी चमत्कार के नाम पर ढोंग रचकर लोगों को दिग्भ्रमित करते थे। कहा तो यहाँ तक जाता है की ये महाशय बकरों एवं मुर्गों के खून से नहलवा कर नेताओं को चुनावों में जीत हासिल करवाने के लिए पाखंडी धार्मिक अनुष्ठान करवाते थे। इन्ही की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में ओझा और सोखा भी पाखंड रचकर धन-दौलत एवं अंधविश्वास के वशीभूत निःसंतानियों को पुत्र प्राप्ति की लालच देकर नरबली तक चढ़वा देते हैं। यह अंधविश्वास का एक क्रूरतम एवं मानवता को अंदर तक हिला देने वाला स्वरूप है जो कि सभ्य समाज के लिए कलंक है।

चमत्कार को ही सत्य मान लेने वालों की कमी नहीं है। अब यहाँ हम एक ऐसे शख्स डॉ॰ पाल दिनाकरण की तथाकथित चमत्कारिक शक्तियों के बारे मे चर्चा करेंगे जो कि वर्तमान में लगभग 5000 करोड़ कि संपत्ति के स्वामी हैं। इनके पिता डॉ॰ डी॰जी॰एस॰ दिनाकरण, जैसा कि वे स्वयं कहते थे, को ईसा मसीह ने साक्षात दर्शन देकर अपनी शक्तियाँ दी। बाद में यही शक्तियाँ बेटे में स्थानांतरित हो गईं। ये भी निर्मल बाबा की तरह गाडमैन बनकर लोगों को कृपा और आशीर्वाद बाँट रहे हैं और उनके दैहिक व दैविक दुखों को मिटा रहे हैं। यहाँ इन महाशय के पाखंडी चमत्कार का नमूना इस तरह है कि एक बार एक “ब्लेसिंग गैदरिंग” में 5 लाख लोग इकट्ठा हुए थे कि अचानक बारिश शुरू हो गई। इस मसीहा ने “गाड” से बारिश बंद करने को कहा तो बंद हो गई। लोग झूम उठे और इनकी स्व-घोषित ईश्वरीय शक्ति के वशीभूत हो गये। फिर क्या, चल पड़ी इनके पाखंड की दुकान और आज देश ही नहीं विदेशों में भी इनकी मसीही की तूती बोल रही है। यह केवल अज्ञानी ही मान सकता है कि किसी के कहने मात्र पर बारिश बंद हो जाए क्योंकि यह ईश्वरीय व्यवस्था एवं प्रकृति के नियमो के विरुद्ध है। यहाँ तो ऐसा लगता है कि डॉ॰ पाल स्वयं ईश्वर हो गये है ईश्वर इनका आज्ञाकारी शिष्य। आगे बढ़े तो पाते हैं कि सत्य साईबाबा भी इसी तरह का चमत्कार करते हुए अपने घुँघराले बालों से भभूत, मेवा, सोने-चांदी के आभूषण, घड़ियाँ आदि निकाल कर अपने शिष्यों को दिखाते थे। इन्ही चमत्कारों के प्रभाव से इनके मठ के पास भी हजारों करोड़ की सम्पदा है। बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि उनकी मृत्यु 96वें वर्ष में होगी लेकिन 85 के पहले ही परलोक को सिधार गये। इस मामले में कहाँ गईं इनकी दिव्य शक्तियाँ। इसे बाबा का पाखंड एवं शिष्यों का अंधविश्वास कहें या फिर कुछ और। जिस देश में इस तरह के विलक्षण शक्ति वाले दिव्य पुरुष मौजूद हो उसे किसी तरह की चिंता होनी ही नहीं चाहिए। इनका उपयोग देश की सीमा की सुरक्षा, सूखा, बाढ़ एवं आपदा आदि के समय करना चाहिए। जिस तरह के हथियार की आवश्यकता हो वे पलक भजते ही उपलब्ध करा देंगे। बारिश की तरह बाढ़, भूकंप आदि पहले से जानकर रोक देंगे। मौसम विज्ञानी की कोई आवश्यकता नहीं होगी। यदि वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो निश्चित रूप से यह उनकी ठगी एवं पाखंड है।

मुस्लिम समुदाय में भी कुछ इसी तरह के तथाकथित चमत्कारी फकीर, मुल्ला, गाजी और पीर हैं जो जिन्न भगाने, झाड-फूंक करने, ताबीज-गंडा बांधने आदि की दुकाने चलाते हैं। झाड-फूँक का एक वीभत्स दृश्य किछौछा, जनपद अकबरपुर, उ॰ प्र॰ में मकदूम अशरफ की मजार में देखने को मिलता है जहां विक्षिप्त औरतें अपने इलाज़ के लिए जाती हैं। उनके साथ बाल खींच-खींच कर जिन्न उतारने के लिए जो पाखंड पूर्ण कृत्य किया जाता है वह स्तब्धकारी होता है। उनके साथ बदतमीजी की इंतहा होती है। प्रायः ऐसे दरगाह पाखंड के केंद्र होते हैं। हिंदुओं के भी कई ऐसे स्थल अछूते नहीं हैं। हिन्दू जन्म से ही धर्मभीरू होते हैं। किसी भी पंथ के पूजा स्थल पर बड़ी श्रद्धा के साथ सिर झुकाते हैं। कब्रों पर जाकर मन्नत मानने वाले सबसे ज्यादा हिन्दू ही होते हैं क्योंकि उन्हे वहाँ से चमत्कार की आशा होती है। इस्लाम में बुत-परस्ती निषेध है, इसलिए इस मत का पक्का अनुयायी अमूमन ऐसा नहीं करता है। ध्यान रहे सत्य केवल सत्य ही होता है और उसका कोई विकल्प नहीं होता।

हम नित नए चमत्कारियों का उदय होते हुए देखते हैं जो पाखंड एवं अंधविश्वास द्वारा लोगों को अपने जाल में फँसाते रहते हैं। इसके लिए ऐसे बाबाओं, गाजियों, मसीहों को ही दोषी नहीं जा सकता है क्योंकि लोग ही उनके पास जाते है। इसके पीछे अशिक्षा को कारण नहीं माना जा सकता क्योंकि इन चमत्कारियों के पास जाने वाले लोगों में पढे-लिखे लोगों की संख्या कम नहीं होती है। निर्मल बाबा के समागम में प्रतिभागिता कर रहे व्यक्तियों द्वारा दिये जाने वाले परिचय से पता चलता है कि उनमें चिकित्सक, इंजीनियर, शिक्षक, बड़े-बड़े अधिकारी और व्यापारी भी उनकी दिव्य कृपा पाने के लिए आते हैं ताकि उन्हें दुख और दारिद्र्य से मुक्ति मिल सके। चंद्रास्वामी, बाल्टीबाबा के शिष्यों में बड़े-बड़े नेता ही थे। ऐसे चमत्कार के मेलों में सभी लोग इन पाखंडी बाबाओं के तीसरे नेत्र से अपने भविष्य का सब कुछ जान लेने के लिए उत्सुक रहते हैं जबकि व्यक्ति स्वयं त्रिकालदर्शी है। व्यक्ति के तीनों काल भूत, वर्तमान एवं भविष्य उसके कर्म से ही निश्चित होते हैं। पिछले जन्म में जो हमने कर्म किया है उसी का फल वर्तमान में प्रारब्ध के रूप में भोग रहे हैं, वर्तमान में जो कर रहे है उसका कुछ फल यहीं भोगेंगे और कुछ भविष्य में पुनः प्रारब्ध के रूप में। फिर हम अपना भविष्य जानने के लिए क्यों इधर-उधर भटकते हैं। जब परमात्मा हमारे प्रत्येक कर्म का न्याय पूर्वक फल देने वाला है तब ऐसे ढोंगी, पाखंडी, अंधविश्वासी एवं लुटेरे बाबाओं की कृपा और आशीर्वाद से कैसे कुछ बदल सकता है। क्या ईश्वरीय व्यवस्था में कोई संसारी व्यक्ति किसी प्रकार का हस्तक्षेप कर सकता है? इसका उत्तर ही शंकालुओं की शंका का निदान है। हाँ, इतना अवश्य है कि इन ढोंगियों के पाखंडपूर्ण कर्मो से उनके भविष्य का पता हमे जरूर चलता है क्योंकि उन्हें भी ईश्वरीय न्याय व्यवस्था के अंतर्गत उनके प्रत्येक पाखंडपूर्ण कर्म का फल उतनी ही मात्रा में इसी जन्म में या अगले जन्म में भोगना अटल है।

अन्त में, जब यह सर्व विदित है कि “सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है” तब भी लोग चमत्कार के रूप में विद्यमान असत्य विद्या के पीछे क्यों भाग रहे हैं, समझ से परे है। हमे तो परमात्मा से बस यही प्रार्थना करना चाहिए कि:
तूने हमे उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू।
सृष्टि की बस्तु-बस्तु में, विद्यमान हो रहा है तू।।
तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते तेरी दया।
ईश्वर हमारी बुद्धि को, सद्मार्ग पर तू चला।।

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
May 22, 2012

हार्दिक बधाई

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 20, 2012

सटीक लेख , जागरूकता के लिए जरूरी है. दोहरी बधाई.

shiromanisampoorna के द्वारा
May 19, 2012

आदरणीय डॉ.साब, सादर श्री राधे एकदम सटीक आलेख धर्मान्धता पर,बहुत-बहुत बधाई…………………./

abhilasha shivhare gupta के द्वारा
May 18, 2012

बहुत बहुत बधाई डॉक्टर साहब….. बेस्ट ब्लोगर घोषित किये जाने पर….. आपने बड़ी ही सटीक तरीके से धर्मान्धता की सच्चाई को उजागर किया है…. आपकी तरीक करने के लिए मई बहुत छोटी हूँ…. यदि मई ज्यादा तारीफ लिखू तो यह छोटे मुह बड़ी बात होगी…..

yamunapathak के द्वारा
May 18, 2012

bahut-bahut badhaai sir.

चन्दन राय के द्वारा
May 18, 2012

डॉक्टर साहब , आपने अपने आलेख के द्वारा आस्था को अन्धविश्वाश की तरफ बढ़ते हुए विद्रूप को बहुत ही प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है , आज का मानव बड़ा कमजोर है , हर छोटे से दुःख पर भगवान् की तरफ रुख कर लिया , नहीं काम बन पाया तो किसी ढोंगी बाबा को अपना भगवान् मान लिया , तह उसने कभी देख ही नहीं की सुख दुःख चलायमान है , महनत करने पर ही भगवान् रास्ता दिखाते है , अंत में Best blogger बन्ने पर hardik badhai

panditsameerkhan के द्वारा
May 18, 2012

डॉक्टर साहब आपने ढोंगी बाबाओ पर काफी अच्छी जानकारी एकत्र कर रखी है जिसके लिए आप प्रशंसा के पात्र है….इसके आलावा भी आपने समाज में फैले पाखंड पर बहुत सटीक बाते हमारे सामने रखी…..समाज में व्याप्त इस बुराई के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार हमारी शिक्षण पद्धति और समाज स्वयं है, सालों पढ़ाई करने के बाद भी व्यक्ति वैज्ञानिक सोंच विकसित नहीं कर पाता और धर्म का नाम आते ही एक अशिक्षित व्यक्ति की तरह अंधा हो जाता है….कुछ व्यक्ति जो इस तरह के आडम्बरों का विरोध करते हैं उनको नास्तिक और नासमझ कहा जाता है तथा पाखंडियों द्वारा और उनके अंध भक्तो द्वारा उल्टा उन्ही का विरोध शुरू कर दिया जाता है….राजनीतिज्ञ इस मामले में पड़ते नहीं क्योंकि इससे उनके वोट बैंक पर असर पड़ने का खतरा बना रहता है….लेकिन एक बात बिलकुल समझ में नहीं आती की धर्म के नाम पर सदियों से ठगी जाने वाली आम जनता स्वयं कब समझेगी की ये सब कुछ वाक्पटु लोगों के पैसे कमाने के धंधे मात्र है न की समाज या उनकी स्वयं की भलाई के उपाय…आपने इस मामले पर बहुत अच्छा लेख लिखा इसके लिए आपको बधाई मेरे एक ऐसे ही लेख पर आपके विचारों का स्वागत है http://panditsameerkhan.jagranjunction.com/2012/05/15/कुछ-तो-लोग-कहेंगे/

aryasanskritikendra के द्वारा
May 17, 2012

परमात्मा हर जगह मौजूद है, परन्तु उसकी अर्थात आत्माओं के आत्मा की प्राप्ति अपने अन्दर ही होती है | न तस्य प्रतिमा अस्ति यस्य नामः महाध्यषा | जिसके नाम का महद अर्थात महान यश सारे संसार में फैला हुआ है उस परमात्मा की कोई प्रतिमा अर्थात मूर्ति नहीं होती | रामायण का नाम राम चरित मानस है ना की राम चित्र मानस | राम का चरित्र पूजनीय है और उस पूजा का मतलब है की हम भी राम जैसे मर्यादा पुरुषोतम बने |

sinsera के द्वारा
May 17, 2012

आदरणीय सिंह साहब , सादर नमस्कार, धन्य है ये हमारा भारत देश , समझ में नहीं आता कि पढ़े लिखे लोग ऐसे बाबाओं पर आंख मूँद कर कैसे विश्वास कर लेते हैं…अगर परालौकिक शक्ति पर इतना ही विश्वास है तो खुद ही कुण्डलिनी जागृत करें…सारे कष्ट दूर हो जायेंगे….शक्ति कोई सामान तो है नहीं कि किसी को हस्तांतरित किया जा सके… आपकी सोच को नमन और बेस्ट ब्लॉगर बनने की बधाई…

omdikshit के द्वारा
May 17, 2012

डाक्टर साहब, नमस्कार. बाबाओं का क्या दोष है? जब मूर्खों की कमी नहीं है.बेस्ट ब्लागर की बधाई.

meenakshi के द्वारा
May 17, 2012

आपको ‘ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक’ सम्मान के लिए बधाई! meenakshi srivastavaa

jlsingh के द्वारा
May 17, 2012

यह सर्व विदित है कि “सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है” तब भी लोग चमत्कार के रूप में विद्यमान असत्य विद्या के पीछे क्यों भाग रहे हैं, समझ से परे है। हमे तो परमात्मा से बस यही प्रार्थना करना चाहिए कि: तूने हमे उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू। सृष्टि की बस्तु-बस्तु में, विद्यमान हो रहा है तू।। तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते तेरी दया। ईश्वर हमारी बुद्धि को, सद्मार्ग पर तू चला।। आदरणीय सिंह साहब, नमस्कार! आपने तथ्यों के आधार पर सम्पूर्ण विवेचना की है. अंत में सुन्दर सन्देश भी दिया है. आप ऐसे ही लिखते रहें और और मार्गदर्शन करते रहे! आपको ‘ब्लोग्गर ऑफ़ द वीक’ सम्मान के लिए बधाई!

ajitsaxena के द्वारा
May 17, 2012

अत्यंत सुन्दर. बिना परिश्रम किये संक्षिप्त रास्ते से धन-दौलत, यश-कीर्ति पाने की लालसा रखने वाले आज अनगिनत है. यह सब मीडिया की देन है. मीडिया ऐसे लोगो में इस तरह से हवा भरता है की ये आसमान में उड़ने लगते है और रातो रात जनता में हीरो बन जाते है इसे का फ़ायदा उठाकर लाखो- करोडो में खेलते है. स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ……..श्री श्री रवि रवि शंकर आदि …… यदपि दार्शनिक, rastra हित …..सम्बन्धी बाते करते है जिससे न केवल जनता में उनकी छवि अच्छी है लेकिन इनमे मीडिया की हवा भरी है .बिना मीडिया की हवा के ये सब फूस हो जायेगे. गाँधी जी बिनोवा भावे जी…. आदि सज्जन लोगो ने बिना मीडिया की हवा के देश हित के कम किये है , कर्म किया है उपदेश नहीं देये है, तभी देश उनको याद करता है, चन्द्र शेखर आज़ाद, भगत सिंह , विस्मिल्लाह खान ………महान देश भक्तो ने त्याग किया है, कोई चमत्कार नहीं किये. इसमें कोई संदेह नहीं स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ……..श्री श्री रवि रवि शंकर आदि …..के करोडो करोडो अनुयाये है, इन लोगो की बात पर भक्तगण कुछ भी करने को नहीं हिचकिचाते है .यदि ये अपने अनुयाई लोगो से पेड़ लगाओ आन्दोलन चलवाए तो न केवल एक महीने में देश के कोने कोने में हर किस्म के सुन्दर छायादार करोडो करोड़ पेड़ लग जायेगे जिसका सबब ये होगा की लोग स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ……..श्री श्री रवि रवि शंकर आदि ……के नाम से पेड़ का नाम लेगे और उनके सामने यह प्रतीक स्वरुप हमेश रहेगा की इन महापुर्शो का सन्देश देश की लोगो में भ्रस्टाचार, बेमानी, मककारी, आदि बुराई के खेलाफ़ लोगो में रास्त्र हित, देश प्रेम , सौहाद्र ,दर्शन, …………सभी अच्छे अच्छे कर्म के लिए मार्ग दर्शन का प्रतिक होगे. आज नहीं कुछ वर्षो में ये पेड़ देश में बड़ी क्रांति लायेगे, इन पदों में मीडिया की हवा नहीं होगी इनमे स्वामी राम देव, आशाराम बापू मोरारी बापू, ……..श्री श्री रवि रवि शंकर आदि ……की भावना होगी .

    jlsingh के द्वारा
    May 17, 2012

    बहुत ही अच्छा सुझाव रखा है, आपने सक्सेना साहब, पर इनसे उनकी कमाई बढ़नी चाहिए!…..

आर.एन. शाही के द्वारा
May 17, 2012

सम्मोहक आलेख, और आँखें खोलने वाला भी. आश्चर्य है कि पोस्ट पर सराहनाएं अत्यल्प मात्रा में दिख रही हैं, वह भी बेस्ट ब्लॉगर बनाने के बाद की. सबसे अच्छी बात ये लगी कि आपने नास्तिकता का कोई ढोंग या आधुनिकता का कोई दिखावा किये बिना बात को पूरी बोधगम्यता से रखा, और पूरे विस्तार के साथ भी. ऐसे लेख बड़े लाभदायक होते हैं. बधाई.

D33P के द्वारा
May 17, 2012

Best Blogger of the Week होने की बधाई

D33P के द्वारा
May 17, 2012

नमस्कार Best Blogger of the Week होने की बधाई आपको

Santosh Kumar के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय डा. साहब ,.सादर अभिवादन बहुत अच्छी पोस्ट आपकी ,.दरअसल आजका समाज ही पाखंडी हो गया है तो पाखंडी गुरुओं का पैदा होना स्वाभाविक है ,.जब हम खुद ही भगवान से गाड़ी, बंगला ,धन दौलत मांगते हैं तो यह मानकर मांगते हैं कि अब मिलने ही वाला है ,..यही काम जब कोई चोला पहने और तमाम झूठे साक्ष्यों के साथ कोई बाबा करता है तो मूरखों का उनके पीछे लगना ही है ,..अच्छी पोस्ट के लिए हार्दिक आभार आपका


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